Mohammed Shami: उम्र 36 पार... विकेट की भूख पुरानी जैसी, 100 फर्स्ट क्लास मैच के बाद शमी बोले- बैज के लिए खेलता हूं
Mohammed Shami: मोहम्मद शमी ने अपने 100वें फर्स्ट क्लास मैच को यादगार बना दिया। दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले शमी ने कहा कि उम्र भले ही 36 के पार हो गई है, लेकिन क्रिकेट खेलने की भूख कम नहीं हुई है। उनके लिए हर मैच टीम की जिम्मेदारी निभाने और अगले स्तर तक पहुंचने का मौका है।
36 की उम्र में भी शमी में गेंदबाजी और विकेट को लेकर जूनून कम नहीं हुआ है।
- Published: 11 Sep 2026, 04:06 PM IST
- Last Updated: 11 Sep 2026, 04:06 PM IST
Mohammed Shami first class career: मोहम्मद शमी ने अपने 100वें फर्स्ट क्लास मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए ईस्ट जोन को दलीप ट्रॉफी का चैंपियन बनाने में अहम योगदान दिया। चेन्नई के चेपॉक में खेले गए फाइनल में शमी ने गेंद से कमाल दिखाया और इस खास मुकाम को यादगार बना दिया। मैच के बाद उन्होंने साफ कहा कि क्रिकेट को लेकर उनकी भूख अभी भी पहले जैसी ही है।
36 साल के हो चुके शमी ने कहा कि मोटिवेट रहने के लिए हमेशा कोई न कोई वजह मिल सकती है। उनके मुताबिक, इस स्तर पर अगर खिलाड़ी खुद को मोटिवेट नहीं कर पा रहा है तो उसका नजरिया ही गलत है। शमी का मंत्र भी बिल्कुल साफ है- जिस स्तर पर खेलने का मौका मिले, उसे पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से भुनाना है।
1 वर्ष से अधिक समय से टीम से बाहर शमी
मोहम्मद शमी चोट से ऊबरकर लगातार घरेलू क्रिकेट में परफार्म कर रहे हैं। वह राष्ट्रीय टीम में खेलना चाहते हैं, लेकिन चयनकर्ता उनकी फिटनेस को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिखते। हालांकि शमी ने हर बार इसे गलत साबित किया है। वह लगातार विकेट लेकर और लय के साथ गेंदबाजी कर रहे हैं। शमी ने आखिरी बार 9 मार्च 2025 को चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। इस मैच में उन्होंने 7 ओवर की गेंदबाजी करते हुए 1 विकेट लिया था। इस मैच में वह ज्यादा प्रभावी नहीं थे। हालांकि इससे पहले टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था।
शमी ने कहा कि वह हमेशा ‘बैज के लिए खेलने’ की बात करते हैं। जब सीने पर टीम का बैज होता है तो क्रिकेट का स्तर मायने नहीं रखता। उस बैज के लिए खेलने का गर्व ही खिलाड़ी के अंदर लड़ने की भूख पैदा करता है। यही सोच शमी को अब भी मैदान पर पूरी ताकत लगाने के लिए प्रेरित करती है।
चेपॉक की पिच बल्लेबाजों के लिए अच्छी थी और गेंदबाजों के लिए ज्यादा मदद नहीं थी। इसके बावजूद शमी ने नई गेंद से पारंपरिक स्विंग हासिल की और पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग का शानदार इस्तेमाल किया। उन्होंने साउथ जोन के बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया और मुकेश कुमार के साथ मिलकर 5 विकेट साझा किए। दोनों की गेंदबाजी के दम पर ईस्ट जोन ने साउथ को 336 रन पर समेट दिया और पहली पारी में बड़ी बढ़त हासिल की, जो अंत में खिताबी जीत की वजह बनी।
शमी ने बताया कि ऐसी गर्मी में रिवर्स स्विंग गेंदबाज का बड़ा हथियार होती है। उन्होंने शेख रशीद के विकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले लगातार गेंद को बाहर निकालकर बल्लेबाज के दिमाग में इसकी आदत बनानी थी और फिर अचानक गेंद को अंदर लाकर उन्हें फंसाना था।
मैच के दौरान 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने भी शमी के साथ खूब मस्ती की। रशीद का विकेट गिरने पर वैभव खुशी में शमी के ऊपर चढ़ गए और उनकी पीठ पर बैठकर जश्न मनाया। शमी ने मजाक में कहा कि वह अक्सर उन्हें छेड़ते हैं और कहते हैं कि उनकी क्रिकेट करियर की उम्र भी वैभव की उम्र से ज्यादा है।
शमी ने कहा कि युवा खिलाड़ियों में आज काफी परिपक्वता है। आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में खेलने से वे जल्दी सीख रहे हैं। ऐसे में उन्हें ज्यादा कोचिंग देने की जरूरत नहीं, लेकिन मुश्किल समय में सही रणनीतिक सलाह देकर लड़ते रहने की याद दिलाना जरूरी है।