T20I में एक हार के बाद लगातार तीन मैच जीत रही टीम इंडिया, 2020 के बाद दोगुनी हुई जीत की रफ्तार

Prabhat Khabar NaN days ago

टीम इंडिया ने T20 क्रिकेट में 2020 के बाद जीत का ग्राफ 3 गुना बढ़ाया है. जानिए कैसे बदला खेलने का अंदाज और बढ़ा जीत का रेसियो.

आंकड़े बताते हैं कि 2020 से 2026 के बीच भारत ने 174 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और इनमें 122 में जीत दर्ज की. इसके मुकाबले 2006 से 2019 के बीच टीम को 126 मैचों में 78 जीत मिली थी. यानी कम समय में ज्यादा मैच खेलने के साथ भारतीय टीम की जीत की संख्या भी तेजी से बढ़ी है.

भारतीय टी-20 क्रिकेट की इस यात्रा में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में 2007 में जीता गया पहला टी-20 विश्व कप एक अहम पड़ाव रहा. इसके बाद रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों ने इस प्रारूप में भारतीय क्रिकेट की पहचान मजबूत की. अब नई पीढ़ी के खिलाड़ी भी आक्रामक बल्लेबाजी और बड़े लक्ष्य का पीछा करने की रणनीति को आगे बढ़ा रहे हैं.

2020 के बाद 174 मैचों में भारत ने दर्ज की 122 जीत

विकेट लेने के बाद सेलिब्रेट करती भारतीय टीम फोटो—एक्स
विकेट लेने के बाद सेलिब्रेट करती भारतीय टीम फोटो—एक्स

भारतीय टीम के प्रदर्शन की तुलना करें तो 2020 से पहले और उसके बाद के आंकड़ों में स्पष्ट अंतर नजर आता है. 2006 से 2019 के बीच भारत ने 126 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले थे, जिनमें 78 में जीत मिली और 44 में हार का सामना करना पड़ा. वहीं, 2020 से 2026 के बीच टीम ने 174 मुकाबले खेले और 122 मैच जीते. इस दौरान हार की संख्या 39 रही.

भारत की जीत-हार का रेसियो भी 1.77 से बढ़कर 3.13 हो गया. इसका मतलब है कि 2020 के बाद भारतीय टीम ने हार के मुकाबले कहीं अधिक मैच जीते. इस अवधि में टीम का प्रति ओवर रन बनाने का औसत भी 8.30 से बढ़कर 9.38 हो गया.

भारत के टी-20 अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन की तुलना

प्रदर्शन 2006-2019 2020-2026
कुल मैच 126 174
जीत 78 122
हार 44 39
टाई 1 6
बेनतीजा मैच 3 7
जीत-हार का अनुपात 1.77 3.13
प्रति ओवर रन 8.30 9.38
सर्वोच्च स्कोर 260 297
न्यूनतम स्कोर 74 76

इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय टीम ने सिर्फ ज्यादा मैच नहीं जीते, बल्कि रन बनाने की गति में भी सुधार किया है. 2020 से पहले भारत का सर्वोच्च टी-20 अंतरराष्ट्रीय स्कोर 260 रन था, जबकि 2020-2026 की अवधि में टीम 297 रन तक पहुंची. यह बदलाव भारतीय बल्लेबाजी के आक्रामक होते अंदाज को दर्शाता है.

2007 में धोनी की कप्तानी में मिली विश्व कप जीत ने बदली तस्वीर

भारत ने दिसंबर 2006 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना पहला टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला था. शुरुआती दौर में इस प्रारूप को लेकर टीमों की रणनीति और प्राथमिकताएं आज जैसी नहीं थीं. हालांकि, 2007 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने पहला टी-20 विश्व कप जीतकर इस प्रारूप में अपनी क्षमता साबित की.

उस समय भारतीय टीम ने युवा खिलाड़ियों के साथ टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था. पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में जीत ने देश में टी-20 क्रिकेट की लोकप्रियता को नई दिशा दी. इसके बाद इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की शुरुआत ने भारतीय खिलाड़ियों को छोटे प्रारूप में लगातार खेलने और अलग-अलग परिस्थितियों में खुद को बेहतर बनाने का अवसर दिया.

समय के साथ भारतीय बल्लेबाजों ने पावरप्ले में तेजी से रन बनाने, बीच के ओवरों में दबाव बनाए रखने और आखिरी ओवरों में बड़े शॉट लगाने की रणनीति पर अधिक जोर दिया. गेंदबाजी में भी विकेट लेने के साथ रन रोकने की क्षमता को प्राथमिकता मिलने लगी. इसका असर टीम के समग्र प्रदर्शन में दिखाई देता है.

रोहित शर्मा और विराट कोहली ने बनाई नई पहचान

रोहित शर्मा और विराट कोहली (फोटो- सोशल मीडिया)
रोहित शर्मा और विराट कोहली (फोटो- सोशल मीडिया)

भारतीय टी-20 क्रिकेट के विकास में रोहित शर्मा और विराट कोहली की भूमिका अहम रही है. दोनों ने लंबे समय तक टीम के लिए रन बनाए और अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी उपयोगिता साबित की. रोहित अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और बड़े स्कोर बनाने की क्षमता के लिए पहचाने गए, जबकि विराट ने लक्ष्य का पीछा करते हुए निरंतरता और दबाव में बल्लेबाजी से अपनी अलग पहचान बनाई.

टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रोहित शर्मा ने 4,231 रन बनाए. उनके नाम पांच शतक और 32 अर्धशतक दर्ज हैं. वहीं, विराट कोहली ने 4,188 रन बनाए, जिसमें एक शतक और 38 अर्धशतक शामिल हैं. ये आंकड़े दोनों खिलाड़ियों के लंबे समय तक इस प्रारूप में योगदान को दिखाते हैं.

इन दोनों के बाद भारतीय टीम में नई पीढ़ी के बल्लेबाजों को जिम्मेदारी मिली है. अब टीम की रणनीति में आक्रामक शुरुआत, बड़े स्कोर और लक्ष्य का तेजी से पीछा करने पर विशेष जोर दिखाई देता है.

17 साल के इंतजार के बाद लगातार दो टी-20 विश्व कप खिताब

2007 में पहला टी-20 विश्व कप जीतने के बाद भारत को इस प्रारूप में दूसरी विश्व कप ट्रॉफी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा. भारतीय टीम ने 2024 में रोहित शर्मा की कप्तानी में टी-20 विश्व कप का खिताब जीता. इस जीत के साथ भारत ने 17 साल बाद फिर से यह ट्रॉफी अपने नाम की.

इसके बाद भारतीय टीम ने 2026 में भी टी-20 विश्व कप जीतकर खिताब का बचाव किया. इस उपलब्धि ने छोटे प्रारूप में भारत की मजबूती को और रेखांकित किया. टीम ने अनुभवी खिलाड़ियों के योगदान के साथ युवा प्रतिभाओं को भी अवसर दिए, जिससे उसकी बल्लेबाजी और गेंदबाजी में विकल्प बढ़े.

टी-20 क्रिकेट में भारत की सफलता में गेंदबाजों का भी योगदान

टी-20 क्रिकेट को अक्सर बल्लेबाजों का प्रारूप माना जाता है, लेकिन भारतीय टीम की सफलता में गेंदबाजों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है. तेज गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में विकेट लेने और डेथ ओवरों में रन रोकने की जिम्मेदारी निभाई. स्पिन गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में बल्लेबाजों पर दबाव बनाया.

भुवनेश्वर कुमार जैसे गेंदबाजों ने नई गेंद से स्विंग कराने की क्षमता दिखाई, जबकि अलग-अलग दौर में अन्य तेज गेंदबाजों और स्पिनरों ने टीम की जरूरत के अनुसार योगदान दिया. आधुनिक टी-20 में बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में विविधता और क्षेत्ररक्षण की भूमिका भी परिणाम तय करती है.

सबसे ज्यादा टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने में पाकिस्तान आगे

कुल टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के मामले में पाकिस्तान भारत से आगे है. आंकड़ों के अनुसार जीत की संख्या में भारतीय टीम आगे है. भारत ने 300 मैचों में 200 जीत दर्ज की हैं, जबकि पाकिस्तान ने 304 मैचों में 176 मुकाबले जीते हैं.

प्रमुख टीमों का टी-20 अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड

टीम कुल मैच जीत हार
भारत 300 200 83
पाकिस्तान 304 176 116
बांग्लादेश 269 135 112
दक्षिण अफ्रीका 235 129 101
श्रीलंका 233 128 92
ऑस्ट्रेलिया 229 127 92
वेस्टइंडीज 260 111 133
इंग्लैंड 243 105 130
अफगानिस्तान 168 99 65
स्कॉटलैंड 222 89 128

भारत के खाते में 200 जीत दर्ज हैं, जो इस सूची में सबसे अधिक हैं. पाकिस्तान ने भारत से चार अधिक मैच खेले हैं, लेकिन उसकी जीत की संख्या 176 है. दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया भी इस प्रारूप में लगातार प्रतिस्पर्धी रहे हैं.