पिछले 6 सालों में SENA देशों में टीम इंडिया की हालत खराब, कैसे होगा वनडे वर्ल्ड कप जीतने का सपना साकार
आयरलैंड ने टी20 सीरीज में 0-2 से क्लीन स्वीप किया। इसके बाद इंग्लैंड ने टी20 सीरीज में भारत को 4-0 से शिकस्त दी। हालांकि, वनडे सीरीज में पहला मुकाबला जीतकर टीम ने वापसी की उम्मीद जगाई, लेकिन अगले दो मैच में वो भी धुंधली हो गई। भारत को एक बार फिर सीरीज गंवानी पड़ी। इंग्लैंड दौरा खत्म होने के बाद एक सवाल अब उठने लगा है कि SENA देशों में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। ऐसे में साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में खेलने जाने वाले वनडे वर्ल्ड कप 2027 में जीत दर्ज करने का सपना कैसे साकार होगा?
Authored by : Umesh Kumar
Updated Jul 21, 2026, 12:21 IST
पिछले दो सालों में टीम इंडिया में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। साल 2025 चैंपियन ट्रॉफी के बाद रोहित शर्मा को कप्तानी के पद से हटा दिया गया और शुभमन गिल को वनडे और टेस्ट टीम का नया कप्तान बनाया गया। इस चयन के बाद भारतीय क्रिकेट में नये युग का आरंभ हुआ। वहीं, टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बाद सूर्या की जगह श्रेयस अय्यर को टी20 टीम की कप्तानी सौंपी गई। फिलहाल टीम इंडिया के लिए कुछ भी सही नहीं हो रहा है। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर टीम को निराशा मिली।
आयरलैंड ने टी20 सीरीज में 0-2 से क्लीन स्वीप किया। इसके बाद इंग्लैंड ने टी20 सीरीज में भारत को 4-0 से शिकस्त दी। हालांकि, वनडे सीरीज में पहला मुकाबला जीतकर टीम ने वापसी की उम्मीद जगाई, लेकिन अगले दो मैच में वो भी धुंधली हो गई। भारत को एक बार फिर सीरीज गंवानी पड़ी। इंग्लैंड दौरा खत्म होने के बाद एक सवाल अब उठने लगा है कि SENA देशों में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। ऐसे में साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में खेलने जाने वाले वनडे वर्ल्ड कप 2027 में जीत दर्ज करने का सपना कैसे साकार होगा?
लगातार खराब हो रहा रिकॉर्ड
हालिया समय में यह एक रिवाज सा बन गया है कि भारतीय टीम का अच्छा रिकॉर्ड लगातार खराब होता जा रहा है। उसका दबदबा खत्म हो रहा है। इंग्लैंड में वनडे में मिली शिकस्त ने भारत की SENA (साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया) देशों में खराब होती जा रही स्थिति को उजागर कर दिया है। साल 2020 से अब तक भारत ने 8 वनडे सीरीज SENA देशों में खेली और पिछले 6 सालों में भारत ने इनमें से छह सीरीज गंवाई है और केवल दो में ही जीत दर्ज कर पाई है।
2020 से SENA देशों में भारत का वनडे सीरीज में रिकॉर्ड-
| समय | देश | रिजल्ट | प्रदर्शन |
| 2020 | न्यूजीलैंड | हारे | 0-3 |
| 2020 | ऑस्ट्रेलिया | हारे | 1-2 |
| 2022 | साउथ अफ्रीका | हारे |
|
| 2022 | इंग्लैंड | जीत | 2-1 |
| 2022 | न्यूजीलैंड | हार | 0-1 |
| 2023 | साउथ अफ्रीका | जीत | 2-1 |
| 2025 | ऑस्ट्रेलिया | हार | 1-2 |
| 2026 | इंग्लैंड | हार | 1-2 |
SENA देशों में 24न में से जीते 7 वनडे मैच
भारत ने जनवरी 2020 से अभी तक SENA देशों में कुल 24 वनडे मुकाबले खेले हैं। इनमें से 15 गंवाए हैं और केवल 7 मैच जीते सके हैं। दो मैचों के नतीजे नहीं निकल सके हैं। भारत ने जो सात वनडे जीते हैं, उनमें से तीन इंग्लैंड और दो-दो ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका में आई हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ 2020 के बाद से वनडे सीरीज में भारत को जीत नसीब ही नहीं हुई है। यहां 2020 में 3-0 से हार मिली तो 2022 में 1-0 से।अब कीवी टीम से भारत को नवंबर 2026 में पांच वनडे खेलने हैं। भारत इस रिकॉर्ड को बदलना चाहेगा।
परिस्थितियों से नहीं बैठा पा रहे तालमेल
टीम इंडिया के ये आंकड़े बताते हैं कि वह विदेशी पिचों की परिस्थितियों से तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं। आईपीएल के दौरान बल्लेबाजी के लिए उपयुक्त पिच पर ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करने आदी ज्यादातर बल्लेबाज विदेश की बाउंस खाती पिच पर बल्लेबाजी करने के दौरान फेल हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें रन बनान के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
अनुभव की कमी
बदलाव के दौर से गुजर रही टीम इंडिया में ज्यादातर खिलाड़ी युवा हैं। रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल, जसप्रीत बुमराह और रवींद्र जडेजा को छोड़ दिया जाए तो कोई अन्य अपने साथ अनुभव लेकर नहीं आता है। जो मैच की परिस्थितियों को संभाल सके और उसके हिसाब से खेल सके। हालांकि, 2027 वनडे वर्ल्ड कप में अभी समय है लेकिन उससे पहले ही रोहित के संन्यास की अफवाहें आई। वहीं, रवींद्र जडेजा को वनडे टीम में जगह नहीं मिली। इंग्लैंड के खिलाफ केएल राहुल ने केवल दो मुकाबला खेला। गेंदबाजी में कुलदीप यादव को मौका ही नहीं मिला। अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, गुरनूर ब्रार ने खूब रन लुटाए।
ऐसे में भारतीय टीम मैनेजमेंट को जल्द से जल्द सवालों के जवाब तलाशने होंगे। साथ ही वर्ल्ड कप के लिए अपनी कोर टीम का चयन करना होगा। इसके अलावा खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा मौके देने होंगे जो विदेशी पिचों की परिस्थितियों में खेल सकें, जिससे उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो। साथ ही टीम के अनुभवी खिलाड़ियों को बैक करना होगा। उन पर भरोसा करना होगा और उन्हें खुलकर खेलने की आजादी देनी होगी।