जापान की पिच स्पिनरों के लिए मददगार हो सकती है: वरुण चक्रवर्ती
एएसआईसीएस इंडिया की तरफ से आईएएनएस के साथ एक खास बातचीत में चक्रवर्ती ने कहा, "हर मैच और हर टूर्नामेंट के लिए तैयारी की जरूरी होती है। हमें वो करना ही होगा। यह हर दूसरे टूर्नामेंट की तरह ही है। हम अच्छी तैयारी करेंगे और जो भी हमारे रास्ते में आएगा, हम उसे हराएंगे। गेंदबाजी यूनिट को वहां की स्थिति के मुताबिक ढलना होगा।"
उन्होंने कहा, "मैंने देखा है कि पिचें थोड़ी कम तैयार हो सकती हैं। इसलिए स्पिन को मदद मिल सकती है। मुझे नहीं पता कि जापान का मौसम पिचों के बर्ताव पर क्या असर डालेगा। हम बस हर तरह के हालात का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं।"
टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे चक्रवर्ती ने कहा, "अब तक का सफर बहुत अच्छा रहा है। हमने इस बार वर्ल्ड कप जीता। मेरी चोट की वजह से मुझे दिक्कत हुई थी, लेकिन मैं वापस आ गया हूं और ज्यादा फिट महसूस कर रहा हूं। मैंने बहुत सारी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और रनिंग की है। इसका श्रेय सीओई को जाता है। यहां मैंने बहुत ट्रेनिंग की है।"
उन्होंने कहा, "मैंने क्रिकेट बहुत देर से शुरू किया। 28 साल की उम्र में इंडिया के लिए खेला। मैं बहुत देर से आया हूं। अभी क्रिकेट में सात से आठ साल हो गए हैं और मैं कहूंगा कि मैं अपने करियर के पहले हाफ में हूं। अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना है और अब तक यह एक अलग तरह का सफर रहा है और मुझे लगता है कि यह और भी ऐसा ही होने वाला है।"
अपनी कला को बेहतर बनाने के बारे में बात करते हुए, चक्रवर्ती ने बताया कि वह पर्दे के पीछे लगातार नए वेरिएशन जोड़ने पर काम करते हैं, लेकिन अपने मौजूदा स्किल सेट को बेहतर बनाना उनका मुख्य मकसद है।
अपनी मिस्ट्री गेंदों को हाई-टेक कैमरों और तकनीकी विश्लेषकों से बचाने के सवाल पर चक्रवर्ती ने कहा, "दबाव में गेंदों को सही जगह डालना तकनीक से ज्यादा जरूरी है। अब कोई सीक्रेट नहीं है क्योंकि हर जगह बहुत सारे वीडियो विश्लेषक हैं। आप जो कुछ भी करते हैं वह रिकॉर्ड हो रहा है।"
अपनी कला को बेहतर बनाने के बारे में बात करते हुए, चक्रवर्ती ने बताया कि वह पर्दे के पीछे लगातार नए वेरिएशन जोड़ने पर काम करते हैं, लेकिन अपने मौजूदा स्किल सेट को बेहतर बनाना उनका मुख्य मकसद है।
करियर के लक्ष्यों से जुड़े सवाल पर वरुण ने कहा, "मैं लंबी अवधि के बजाय कम अवधि के गोल सेट करता हूं क्योंकि मुझे नहीं लगता कि मैं पांच साल बाद की योजना बना पाऊंगा। मैं अगले छह महीनों में जो करना चाहता हूं उसकी योजना ही बना पाऊंगा। मैं शॉर्ट-टर्म गोल पर ज्यादा फोकस करता हूं।"