क्रिकेट में क्या है No-Ball नियम? जिससे अभिषेक शर्मा को मिला जीवनदान, जानिए इससे जुड़ी हर जरूरी बात

NewsNationTv NaN days ago

Explainer On No-Ball: अभिषेक शर्मा को दूसरे टी-20 मैच के दौरान नो-बॉल के कारण जीवनदान मिला. तो आइए आज आपको नो बॉल के बारे में विस्तार से बताते हैं.

Explainer On No-Ball
नो बॉल Photograph: (AI)

Explainer On No-Ball: क्रिकेट में गेंदबाज की एक छोटी-सी गलती पूरी टीम पर भारी पड़ सकती है. खासकर लिमिटेड ओवर क्रिकेट में तो नो बॉल को बड़ी गलती माना जाता है, क्योंकि इससे बल्लेबाजी करने वाली टीम को एक अतिरिक्त रन मिलने के साथ अगली गेंद पर फ्री-हिट का मौका भी मिल सकता है. न्यूजीलैंड के साथ खेले गए दूसरे टी-20 मैच में जैकब डफी से एक नो बॉल हो गई, जिससे अभिषेक शर्मा को जीवनदान मिल गया. इसके बाद से ही क्रिकेट के गलियारों में इस टॉपिक पर चर्चा हो रही है. तो आइए इस आर्टिकल में आपको नो बॉल के बारे में विस्तार से बताते हैं. जान लेते हैं कि ये क्या है, कितने तरीके की होती है और इसकी शुरुआत कब हुई?

अभिषेक शर्मा को मिला जीवनदान

न्यूजीलैंड के साथ खेले गए दूसरे टी-20 मैच में अभिषेक शर्मा को जैकब डफी ने आउट कर दिया था, लेकिन गेंदबाज की छोटी सी गलती से अभिषेक को जीवनदान मिल गया. दरअसल, जैकब डफी की गेंद पर नाथन स्मिथ ने बाउंड्री पर कैच भी कर लिया था. लेकिन, फिर मालूम चला कि जिस गेंद पर डफी ने अभिषेक को आउट किया है, वो नो बॉल है.

जी हां, टीवी अंपायर से फ्रंट फुट नो बॉल का सिग्नल मिला. गेंद छोटी डाली गई थी, जिस पर अभिषेक शर्मा ने पुल शॉट खेला, लेकिन गेंद बल्ले के ऊपरी किनारे (टॉप-एज) से लगकर डीप स्क्वायर में स्मिथ के बाईं ओर चली गई. एक बेहतरीन कैच और शानदार गेंदबाजी, लेकिन अभिषेक को जीवनदान मिल गया.

क्या होती है नो बॉल?

क्रिकेट में जब गेंदबाज नियमों के मुताबिक वैध गेंद नहीं डालता, तो अंपायर उसे नो बॉल घोषित कर सकता है. ऐसी स्थिति में बल्लेबाजी करने वाली टीम को कम से कम एक एक्स्ट्रा रन मिलता है और उस गेंद को ओवर की 6 लीगल डिलिवरीज में नहीं गिना जाता. इसका मतलब है कि गेंदबाज को ओवर पूरा करने के लिए एक एक्स्ट्रा बॉल डालनी पड़ती है. नो बॉल पर बल्लेबाज को रन बनाने की भी पूरी आजादी होती है. वह गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचाकर चौका या छक्का लगा सकता है.

पहली बार कब बना था नो बॉल का नियम?

क्रिकेट में नो बॉल का इतिहास काफी पुराना रहा है. मिली जानकारी के मुताबिक, 1774 में क्रिकेट के कानूनों में इसका पहली बार इस्तेमाल किया गया था. शुरुआती दौर में इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि गेंदबाज गेंद डालते समय निर्धारित क्रीज से आगे न निकले. उस समय क्रिकेट के नियम आज की तुलना में काफी अलग थे और नो बॉल घोषित होने पर बल्लेबाजी टीम को मिलने वाले फायदे भी सीमित थे.

इसके बाद समय के साथ नियमों में बदलाव किए गए. 1811 में बल्लेबाज को नो बॉल पर रन बनाने की इजाजत दी गई, जबकि 1829 में नो बॉल के लिए एक रन की पेनल्टी का प्रावधान सामने आया. इसके बाद इस नियम का दायरा भी बढ़ता गया. आज नो बॉल का फैसला केवल पैर की स्थिति के आधार पर नहीं होता, बल्कि गेंदबाजी की तकनीक और खेल के दूसरे नियमों को भी इसमें शामिल किया जाता है.

नो बॉल के प्रकार

 1- फ्रंट फुट नो बॉल:- फ्रंट फुट नो बॉल क्रिकेट में सबसे आम प्रकार है. जब गेंदबाज का अगला पैर क्रीज के आगे पूरी तरह जमीन पर पड़ता है और पैर का कोई हिस्सा क्रीज के पीछे या उसके ऊपर नहीं रहता, तो अंपायर नो बॉल घोषित करता है. इस गलती के कारण गेंदबाजी टीम को अतिरिक्त रन देना पड़ता है। वनडे और टी20 में इसके बाद फ्री-हिट भी मिलती है.

2. थ्रोइंग या चकिंग नो बॉल:- क्रिकेट में गेंदबाज को निर्धारित नियमों के अनुसार गेंद डालनी होती है. यदि वह अवैध तरीके से हाथ सीधा करके गेंद फेंकता है और उसका एक्शन नियमों के खिलाफ पाया जाता है, तो इसे थ्रोइंग या चकिंग कहा जाता है. ऐसी स्थिति में अंपायर नो बॉल दे सकता है. हालांकि, हाथ का मुड़ना या सीधा होना अपने आप में अवैध नहीं है, बल्कि इसके लिए गेंदबाजी एक्शन के निर्धारित नियम लागू होते हैं.

3. दो बार टप्पा खाने वाली गेंद:- यदि गेंद बल्लेबाज तक पहुंचने से पहले पिच पर दो बार या उससे अधिक टप्पा खाती है, तो सामान्य परिस्थितियों में इसे नो बॉल माना जाता है। इसी तरह, गेंद यदि बल्लेबाज तक पहुंचने से पहले जमीन पर लुढ़कती हुई आती है, तो भी नो बॉल दी जा सकती है.

4. पिच के बाहर गिरने वाली गेंद: - गेंदबाज को गेंद निर्धारित पिच पर डालनी होती है. यदि गेंद बल्लेबाज तक पहुंचने से पहले पिच के बाहर गिरती है, तो अंपायर नो बॉल दे सकता है. 

5. कमर से ऊपर फुलटॉस नो बॉल :- यदि बिना टप्पा खाई गेंद बल्लेबाज की कमर से ऊपर की ऊंचाई पर पहुंचती है और बल्लेबाज सीधा खड़ा होता है, तो उसे नो बॉल दिया जाता है. ऐसी गेंद बल्लेबाज के लिए खतरनाक हो सकती है. इस नियम में गेंद की ऊंचाई और लागू क्रिकेट कानूनों को ध्यान में रखा जाता है.

6. खतरनाक बाउंसर नो बॉल:- यदि गेंदबाज निर्धारित सीमा से अधिक बाउंसर डालता है या नियमों के खिलाफ खतरनाक गेंदबाजी करता है, तो अंपायर नो बॉल दे सकता है. हालांकि, हर बाउंसर नो बॉल नहीं होती. इसका फैसला संबंधित फॉर्मेट के नियमों और गेंद की ऊंचाई के आधार पर किया जाता है.

नो बॉल पर बल्लेबाज आउट हो सकता है या नहीं?

नो बॉल पर बल्लेबाज को आउट करने के नियम सामान्य गेंद से अलग होते हैं. क्रिकेट के नियमों के मुताबिक नो बॉल पर बल्लेबाज बोल्ड, कैच आउट, LBW, स्टंप्ड या हिट विकेट नहीं हो सकता. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बल्लेबाज हर परिस्थिति में आउट होने से बच जाता है.

नो बॉल पर बल्लेबाज रन आउट हो सकता है. इसके अलावा, गेंद को जानबूझकर दो बार मारने या फील्डिंग में बाधा डालने जैसी कुछ परिस्थितियों में भी उसे आउट दिया जा सकता है. इसलिए नो बॉल के बावजूद बल्लेबाज को रन लेते समय सतर्क रहना पड़ता है. गेंदबाजी टीम भी बल्लेबाज की गलती का फायदा उठाकर उसे रन आउट कर सकती है.